हिमा दास जीवन परिचय |Hima Das Biography in hindi

दोस्तो आज की डेट में कौन नही जनता की हिमा दास कौन है ? अगर आप थोड़ी बहुत जनरल अवेयरनेस  रखते है और देश दुनिया से अपडेट रहते है तो आपको जरुर मालुम होगा हिमा दास के बारे में. हाल ही में हिमा दास को असम पुलिस में उप अधीक्षक यानी की DSP के पद से नवाजा गया हैHima Das कौन है? हिमा दास जीवन परिचय हिन्दी में

हिमा दास कौन है?

आईये जानते है की हिमा दास कौन है ? और क्या है उनके फेमस होने का राज? दोस्तो हिमा दास भारत के राज्य असम की धावक है जो आईएएएफ अंडर-20 वर्ल्ड एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम करने वाली भारत की पहली महिला धावक बन चुकी है जी हां दोस्तो उन्होंने यह रेस 400 मीटर की दौड़ में हीता है, उन्होंने 400 मीटर की दौड़ मात्र 51.46 सेकंड में दौड़कर पहला स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. 

हिमा दास का  पूरा नाम हिमा रणजीत दास है इनको ढिंग एक्सप्रेस के नाम से भी जाना जाता है वो भारत के असम राज्य की रहने वाली है उनका जन्म 9 जनवरी 2000 ( उम्र 21 साल) को असम राज्य के नागांव जिले के कंधुमिलारी गाँव में हुआ था, वह ढिंग, नागौन, असम की निवासी है उनके पिता रणजीत दास और माता जोनाली दास है उनके पिता किसान और माता घर का काम संभालती है हिमा दास चार भाई बहन है जिनमे से वे सबसे छोटी है. 

कामनवेल्थ खेलो में जो की अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए थे हिमा दास ने भाग लिया था और 400 मीटर की प्रतिश्पर्धा में छठवा स्थान प्राप्त किया था, यह रेस उन्होंने 51.32 सेकंड में कम्पलीट करके यह स्थान हासिल किया था.

हिमा दास का संक्षिप्त परिचय

पूरा नामहिमा रणजीत दास
अन्य नामढिंग एक्सप्रेस , स्वर्ण धावक
जन्म तिथि9 जनवरी 2000
जन्म स्थानकंधुलिमारी गांव, असम राज्य के नागांव जिले में
मूल निवासीगांव -ढिंग , जिला – नागांव, राज्य – असम
राष्ट्रीयताभारतीय (Indian)
किस खेल से सम्बंधित है?ट्रैक एंड फील्ड ( 400 मीटर रेस )
हिमा दास के कोच का नाम क्या है?निपोन दास

हिमा दास का प्रारंभिक जीवन

हिमा दास बचपन से ही खेलकूद के प्रति बहुत ही आकर्षित थी और उनको फुटबॉल में काफी रूचि थी उनका बचपन से ही ये मानना था की वो भी भारत को फुटबॉल खिलाडी के रूप में रिप्रेजेंट करेंगी, मगर होनी को कौन ताल सकता है और रिजल्ट आज आपके सामने है वो भारत की नंबर एक की धावक बन चुकी है, सायद ही उन्होंने ये कभी सोचा होगा की फुटबॉल में भारत को कभी पहले स्थान पर का पाएंगी.

हिमा दास ने दौड़ने की सुरुआत कब की?

उन्होंने अपने स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय के एक शिक्षक के कहने पर दौड़ने की सुरुआत की और वही से उनकी किस्मत ही पलट गयी, पहली बार जिला स्तर पर आयोजित एक प्रतियोगिता के दौरान जब निपोन दास ने उनको नोटिस किया तब उनको भी यह देखकर आश्चर्य चकित रहा गये की इनती छोटी सी बच्ची ने उस प्रतोयोगिता में दो स्वर्ण पदक कैसे जीत लिए और वही से उनकी दौड़ने की ट्रेनिंग की सुरुआत हो गयी. 

निपोन दास स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर के सदस्य थे जिन्होंने काफी रिक्वेस्ट करके हिम और उनके परिवार वालो को इस बात के लिए मन लिया की वे कोई साधारण धावक नही है बल्कि आने वाले समय में वे भारत को कामनवेल्थ खेलो में रिप्रेजेंट कर सकती है. तब तो उनको भी यह विश्वास नही था की ये लड़की स्वर्ण पदक ही ले आएगी लेकिन किस्मत को आजतक कौन समझ पाया है, जो लड़की कभी फूटबाल के प्रति इतनी रूचि रखती थी उसने भारत को दौड़ के खेल में स्वर्ण पदक दिला दिया.

हिमा दास की उपलब्धिया, रिकॉर्ड और पदक

कौन सोच सकता था की 18 साल की छोटी सी एक लड़की जिसकी आँखों में एक फुटबॉलर  बन्ने का सपना पीला हुए है वो एक दिन भारत की पहली महिला धावक बन जाएगी और एक साथ इतने सरे मैडल जीतकर भारत को एक नयी बुलंदियों पर लेकर जाएगी और इतिहास रच देगी

राज्य स्तर में ब्रोंज मैडल तथा जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के फाइनल में स्थान बनाया और अंडर-18 में अच्छा प्रदर्शन देने के बाद उन्हें एशिया एंड वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप 2017 में उन्हें जरा सी चूक के कारण ब्रोंज मैडल से संतोष करना पड़ा.

100मीटर और 200मीटर रेस में सफलता पाने के बाद 2018 कामनवेल्थ खेलो में 400 मीटर स्पर्धा में छठवा स्थान प्राप्त किया जो की गोल्ड कोस्ट में खेले गए थे ये रेस उन्होंने 51.32 सेकंड्स में पूरी की थी

आईएएएफ अंडर-20 वर्ल्ड एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक

फ़िनलैंड की धरती पर इतिहास रच कर हिमा दास ने 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया, ये पदक उन्होंने आईएएएफ अंडर-20 वर्ल्ड एथेलेटिक्स चैंपियनशिप की रेस को पहले नंबर के वोजय करने के उपलक्ष में हासिल किया बता दें की ये रेस 51.46 सेकंड में पूरी करके सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए.

इसके साथ ही उन्होंने पूरी दुनिया को भी ये दिखा दिया की भारत भी पूरी दुनिया में किसी से पीछे नही है एंड्रू मिक्लोस  को हराकर पहले स्थान के साथ ही ये रेस अपने नाम कर लिया. इसके साथ ही वो भारत की पहली महिला धावक/एथलीट बन गयी जिसने वर्ल्ड एथलीट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता हो. इसी के साथ ही ढिंग एक्सप्रेस का नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया.

एशियाई खेलो में हिमा दास की उपलब्धिया

जकार्ता में हुए 18वें 2018 के एशियाई खेलो में हिमा दस ने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 50.79 सेकंड्स में फाइनल राउंड रजत पदक अपने नाम कर लिया.

इसके साथ ही एशियाई खेलो के 4×100मी विमेंस रिले रेस में स्वर्ण पदक हासिल करके एक बार फिर अपना नाम इतिहास के पन्नो में स्वर्ण अक्षरों से लिख दिया, इस रेस में उनके साथ एमआर पुवंमा, सरिता गैकवाद, और वीके विश्माया ने भाग लिया, तथा साथ ही 4×100मी मिक्स्ड रिले रेस का भी हिस्सा बनी जिसमे भारत को फिर से स्वर्ण पदक अपने नाम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

2019 में 19 दिनों में 5 स्वर्ण पदक अपने नाम किया

मात्र 19 दिनों में ही 5 स्वर्ण पदक 200मी की प्रतिश्पर्धा में प्राप्त करके एक बार फिर से इतिहास रच दिया. यह उन्होंने वर्ष 2019 के जुलाई महीने में ही कर दिखाया.

पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स जो की पोलैंड में आयोजित हुआ था इन्होने 200मी के प्रतिश्प्रधा में पहला स्वर्ण पदक मात्र 23.57 सेकंड्स में पूरी कर के जीता और मात्र पांच दिन बाद ही कुटनो एथलेटिक्स मीत के दौरान ही दूसरा स्वर्ण पदक हासिल कर लिया यह रेस उन्होंने 23.97 सेकंड्स में पूरा किया

क्लंदो एथलेटिक्स मीत में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया और फिर तबोर एथलेटिक्स मीत के दौरान 200मी की रेस मात्र 23.25 सेकंड्स में पूरा कर चौथा स्वर्ण पदक हासिल कर लिया.

मेज़िनारोद्नी अत्लेतिक्यी मितिंक चेक गणराज्य में मात्र 19 दिनों में ही पाच स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास लिख दिया

Conslusion

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