देवी बना पूजते जिसे | हिन्दी कविता (Hindi Poetry)

पूजते है देवी बना जिसे, नवरातो में, वही सुरक्षित नहीं इन्सानी हाथो में। कहा रखे इन्हे छुपाकर, रबर की गुड़िया नहीं जिसे टांग दे खुटी पर। सर्म करो कुछ अपनी नजर का, कैसे जी पाओगे खुद अपनी ही नजर में। होती है राजनीती इन मुददो पर अक्सर , गिरता जा …

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